हिमाचल के नशा निवारण केंद्र होने लगे फुल; युवाओं में बढ़ी चिट्टे की लत, हर रोज आ रहे नए मामले
धर्मशाला : हिमाचल प्रदेश के कच्ची उम्र के नौजवान सबसे अधिक चिट्टे की चपेट में आ रहे हैं। आलम यह है कि प्रदेश में बने अधिकतर नशा निवारण केंद्र फुल हो रहे हैं।
जानकारी के अनुसार 21 से 30 आयु वर्ग के सबसे ज्यादा नौजवान चिट्टे जैसे जहर का सेवन करने में मशगूल हैं। चिट्टे सहित अन्य नशीले पदार्थों के सेवन से नशा निवारण केंद्र भर गए हैं। ऐसे हालत के बीच डाक्टर, पुलिस व प्रशासनिक अधिकारी अभिभावकों से आह्वान कर रहे हैं कि वह नशे की बीमारी को छुपाएं नहीं बल्कि इसका इलाज करवाएं।
पुलिस विभाग समय-समय पर नशे के खिलाफ जागरूकता मुहिम चला रहा है और चिट्टा माफिया को सलाखों के पीछे भी पहुंचाया जा रहा है, लेकिन रातों-रात अमीर बनने के चक्कर में नशा माफिया नशा बेचने से बाज नहीं आ रहा है। एसएसपी कांगड़ा शालिनी अग्निहोत्री का कहना है कि पुलिस नशा माफिया की धर-पकड़ में दिन-रात जुटी है, लेकिन नशे के सर्वनाश के लिए जनसहभागिता भी जरूरी है।
केंद्र में युवाओं की बढ़ती संख्या से चिंता
एडीसी विनय कुमार का कहना है कि नशा निवारण केंद्रीय में युवाओं की बढ़ती संख्या चिंता पैदा करने वाली है। इसके लिए समाज को जागना होगा और पुलिस व प्रशासन के साथ नशे के बढ़ते प्रचलन को रोकने के लिए आगे आना होगा। नशा निवारण केंद्रों में 21 से 30 साल के युवाओं की संख्या सबसे अधिक है। चिट्टे जैसे जानलेवा नशे से नौनिहालों को बचाना है, तो अभिभावकों को खुद आगे आना होगा। उन्होंने कहा कि किसी का बच्चा नशे का आदी हो रहा है, तो उसका समय रहते इलाज करवाएं। (SBP)